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Central Pulp & Paper Research Institute (CPPRI), A National level institute to promote R&D in the field of pulp & paper
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Institute Membership
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निदेशक की कलम से



केन्द्रीय लुग्दी एवं कागज अनुसंधान की स्थापना भारतीय कागज उद्योग के अनुसंधान एवं विकास, रेशेदार कच्चे माल के मूल्यांकन के लिये यू.एन.डी.पी. व भारत सरकार की परियोजना के रूप में 1975 में हुई। उपर्युक्त परियोजना के समापन के बाद भारतीय कागज उद्योग की सहायता के लिये सी.पी.पी.आर.आई. राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान संस्थान के रूप में असतित्व में आया। संस्थान अनुसंधान एवं विकास की पहल और उच्च गुणवत्ता तकनीकी एवं परामर्श के माध्यम से निरंतर भारतीय लुग्दी एवं कागज उद्योग को सेवायें प्रदान कर रहा है। 11वीं पंचवर्षीय योजनाएं मुख्य रूप से कागज उद्योग के मुख्य मुद्दों (1) कच्चे माल के संरक्षण और उन्नयन (2) गुणवत्ता सुधार (3) ऊर्जा संरक्षण (4) मानव संसाधन विकास के लिए समर्पित हैं। संस्थान निरन्तर कच्चे माल के संरक्ण और उन्न्यन, भण्डारण के दौरान नुकसान को कम करने और समग्र उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हेतु कार्य कर रहा है। इसके परिणाम उत्साहवर्धक रहे हैं जिसमें उद्योग ने गहरी रूचि दिखाई है।

संस्थान ने ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में विकास एवं विशेषज्ञता से ऊर्जा लखा सम्परीक्षा का नेतृत्व किया हैै जिससे विभिन्न मिलों से ऊर्जा सम्परीक्षा का कार्य मिला। इन ऊर्जा सम्परीक्षाओं के माध्यम से की गई सिफारिशों से ऊर्जा के बचत एवं राजस्व में बृद्धि हुई। संस्थान लुग्दी और कागज उद्योग के विभिन्न उपक्षेत्रों में ऊर्जा संरक्षण के लिये दिशा निर्देशों के कार्यान्वयन में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बी.ई.ई.) की सहायता करने में स्वयं को गौरवान्तित महसूस करता है। संस्थान पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है जिसे बड़ी संख्या में दोनो तरह की योजना परियोजनाओं और केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड (सी.पी.सी.बी.) के साथ-साथ कागज मिलों द्वारा प्रायोजित परियोजनाओं में लागू किया गया जिसने कागज उद्योग के सभी तीनो मुख्य क्षेत्र समाहित हुये। संस्थान ने ई.आई.ए. और आर.ई.आई.ए. अध्ययनों, पर्यावरण एवं जल सम्परीक्षा, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के कार्य का मूल्यांकन इत्यादि के लिये विशेषज्ञता विकसित की है। सी.पी.पी.आर.आई. लुग्दीकरण एवं विरंजन के साथ-साथ निस्सारी उपचार एवं पुनःप्राप्ति और लुग्दी एवं कागज उद्योग से उत्पदित रद्दी से उत्पन्न उत्पादों में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग को उच्च प्राथमिकता दे रही है।

मानव संसाधन विकास (एच.आर.डी.) के क्षेत्र में संस्थान लुग्दी, कागज एवं संम्बद्ध उद्योगों के अर्धकुशल/कुशल कर्मियों के कागज निर्माण के बहुत से क्षेत्रों में ज्ञान व्यवसाइक कौशल के उन्नयन हेतु प्रशिक्षण देने हेतु गम्भीर प्रयास कर रहा है। कार्यशालायें, गोष्ठियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम इत्यादि जो लगातार आयोजित किये जाते है के अतिरिक्त सी.पी.पी.आर.आई. स्नातक पाठ्यक्रम प्रस्तावित कर रही है जिससे लुग्दी एवं कागज उद्योग में तकनीकी कर्मचारियों की बढ़ती मांग पूरी की जा सके। संस्थान में एक प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है जिसमें न सिर्फ भारत के बल्कि पड़ोसी देशों के छात्रों को भी प्रशिक्षण दिया जा सके।

सी.पी.पी.आर.आई. संस्थान में विकसित प्रौद्योगिकी के विभिन्न डेमों संयंत्रों की स्थापना करने की योजना बना रहा है। एक पूर्ण पुनःचक्रित कागज प्रसंस्करण पायलट संयंत्र स्थापित करने के प्रयास किये जा रहे हैं जिससे देश में एकत्रित पुनःचक्रित कागज का अधिकतम प्रयोग हो सके। सी.पी.पी.आर.आई. की सेवाएं व विशेषज्ञता केवल लुग्दी एवं कागज मिलों द्वारा ही नहीं बल्कि रसायनों और उपकरण/मशीनरी के आपूर्तिकर्ताओं, बहुत से सरकारी विभागों जिनमें सीमा एवं उत्पाद शुल्क, ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारतीय मानक ब्यूरो आदि के द्वारा भी उपयोग में लायी जा रही है। अन्तराष्ट्रीय सहयोग के तहत संस्थान ने हाल ही में पुत्रा विश्वविद्यालय मलेशिया (यू.पी.एम.) मलेशिया द्वारा पायलट स्तर ’’पूर्ण केनाफ विरंजित लुग्दी’’ के उत्पादन पर एक प्रतिष्ठित प्रायोजित परियोजना पूर्ण की जिसे परीक्षण के लिये निर्यात किया गया और इससे सी.पी.पी.आर.आई. एक अन्तराष्ट्रीय ख्याति के रूप में स्थापित हुआ है।

संस्थान द्वारा ’’आन्तरिक राजस्व के उत्पादन आई.आर.जी.)’’ को बढ़ाने के सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैंऔर बहुत से उद्योगों/संगठनों/विभागों/अभिकरणों से प्रायोजित परियोजनायें प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण प्रयास किये जा रहे हैं। भारत सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं सवंर्द्धन विभाग से समय-समय पर प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार संस्थान में हिन्दी (राजभाषा) के प्रयोग को महत्व और बढ़ावा दिया जा रहा है और सभी कर्मचारियों को कार्यालय का दैनिक कार्य हिन्दी मंे सम्पन्न करने के लिये प्रेरित किया जा रहा है। संस्थान द्वारा इस बेबसाइट को लाने के लिये प्रयास किये गये हैं, मुझे उम्मीद है कि यह बेबसाइट संस्थान और उद्योग के बीच पारस्परिक संवाद का एक माध्यम बनेगी जो संस्थान के उद्येश्यों को पूरा करने के लिये एक लम्बा रास्ता तय करेगी।
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